01असली जगह से चमत्कार साबित नहीं होता।
पत्थर पर मिला एक नाम पूरी किताब की गारंटी नहीं है।
कोई मुझे एक पुराना शिलालेख दिखाता है। उस पर वही नाम है जो बाइबल में भी है। फिर वह कहता है: देख लिया, पुरातत्व ने बाइबल सही साबित कर दी, इसलिए उसके चमत्कार भी सच हैं। मैं शिलालेख स्वीकार करता हूँ। सवाल बीच की छलाँग पर है।
किसी कहानी में असली राजा, सड़क और लड़ाई हो सकती है, जबकि दूसरी घटना गलत हो। कहानी वाले घर का पता मिल जाना उस घर के अंदर बताई गई हर घटना की पुष्टि नहीं करता। हर दावे को उसका अपना आधार चाहिए।
उलटी गलती भी बेईमानी होगी। एक कहानी संदिग्ध निकली तो मैं यह नहीं कह सकता कि बाइबल का कोई व्यक्ति कभी था ही नहीं। नास्तिक होने से मुझे मनपसंद प्रमाण चुनने की छूट नहीं मिलती।
इस भाग में सृष्टि, नूह की बाढ़, बाबेल, मिस्र से निर्गमन, यरीहो का विनाश, यीशु के जन्म का समय और पुनरुत्थान के तर्क जाँचूँगा। मूल कथा, उसकी व्याख्या और बाहर से मिलने वाले प्रमाण अलग कदम हैं।
मेरी कसौटी सीधी है। धार्मिक कहलाने से कोई किताब अपने आप भरोसेमंद इतिहास नहीं बनती। उसमें धर्म होने से उसका हर ऐतिहासिक संकेत बेकार भी नहीं हो जाता। मुझे दिखाइए कि खास प्रमाण से खास निष्कर्ष कैसे निकलता है।
02गलत, अप्रमाणित या जाँच से बाहर?
इन तीन जवाबों का मतलब एक जैसा नहीं है।
मान लीजिए कोई कहता है कि कल रात पूरा कस्बा जल गया। सुबह घर साबुत हैं और लोग उनमें रह रहे हैं। यह दावे के खिलाफ प्रमाण है। दावा सच होता तो हमें कुछ अलग दिखाई देना चाहिए था।
अब कोई कहे कि सदियों पहले एक मुसाफिर इसी कस्बे से गुजरा था। उसकी डायरी नहीं मिलती। इससे यात्रा अप्रमाणित रह सकती है। हर मुसाफिर अपने पीछे पहचान में आने वाला निशान छोड़कर नहीं जाता।
तीसरा दावा हो: किसी अदृश्य शक्ति ने सब बदल दिया और फिर हर निशान मिटा दिया। अब कोई भी नतीजा आए, कहानी बची रहेगी। जाँच से बचने के लिए इस दावे ने वह फर्क ही हटा दिया जिसे जाँचा जा सकता था।
ये समझाने के बनाए उदाहरण हैं, असली खुदाई के नतीजे नहीं। बात यह है कि घटना कितनी बड़ी थी, निशान कितने बच सकते थे और कहाँ खोज हुई। हर गायब निशान का वजन बराबर नहीं होता।
मेरा छोटा जवाब है: पहले दावा बताइए, फिर बताइए कि सच होने पर क्या बचना चाहिए। तभी तय होगा कि प्रमाण खिलाफ हैं, प्रमाण कम हैं या दावा जाँच से बाहर रखा गया है। इनसे हर संभव ईश्वर पर एक ही फैसला नहीं निकलता।
03कौन-सा पाठ, कैसी व्याख्या?
अलग तरह के लेखन को एक ही नारे में मत समेटिए।
यहाँ अंग्रेजी मूल के लिए New American Bible, Revised Edition, यानी NABRE इस्तेमाल किया है। अमेरिकी कैथोलिक बिशपों की संस्था USCCB पर इसका पाठ उपलब्ध है। अध्याय और पद दिए हैं, ताकि आप दूसरी भाषा या अनुवाद से भी तुलना कर सकें।
उत्पत्ति में सृष्टि और पुरखों की कथाएँ हैं। उसका कैथोलिक परिचय अलग साहित्यिक परंपराओं और पुरानी सृष्टि-बाढ़ कथाओं के रूपांतरण पर बात करता है। यह धार्मिक संस्था का अपना विद्वत परिचय है। इसे नास्तिकों की छेड़छाड़ नहीं कहा जा सकता। [1]
कुछ लोग शुरुआती कथाओं को भौतिक घटनाओं का ठीक-ठीक क्रम मानते हैं। दूसरे उन्हें मानवता, गलत काम, जिम्मेदारी और ईश्वर के बारे में धार्मिक साहित्य समझते हैं। पहले दावे पर भूविज्ञान की आपत्ति दूसरे अर्थ को अपने आप गलत नहीं करती।
लेकिन साहित्यिक अर्थ लेने के बाद सुविधानुसार उसी कथा को प्रमाणित वैज्ञानिक समय-सारणी भी नहीं कहा जा सकता। मुझे पहले यह समझना है कि सामने वाला वास्तव में किस बात का बचाव कर रहा है।
कविता और पुलिस की रिपोर्ट एक तरह की बातें नहीं कहतीं। लेखन का प्रकार पहचानने से उसका अर्थ समझने में मदद मिलती है। इससे यह अतिरिक्त बात साबित नहीं हो जाती कि उसे किसी ईश्वर ने लिखवाया था।
04एक अंग्रेजी क्रिया से बहस मत जीतिए।
विवादित अनुवाद के पीछे वजह देखनी होगी।
उत्पत्ति 1 में वनस्पति आकाश की ज्योतियों से पहले आती है। मनुष्य दूसरे जीवों के बाद आते हैं। उत्पत्ति 2:4-25 में ध्यान आदमी, बगीचे, जानवरों और स्त्री पर है। दोनों हिस्से अपनी बात अलग ढंग से रखते हैं। [2] [3]
उत्पत्ति 2:19 में NABRE के अनुसार कथा के दौरान ईश्वर जानवर बनाता है। NIV में पहले बना चुका था वाला अर्थ है; उसकी टिप्पणी दूसरे अर्थ की संभावना भी देती है। इससे मेल बैठाने का रास्ता खुलता है कि दूसरा विवरण पहले का विस्तार है।
मैं यह नहीं कहूँगा कि अंग्रेजी का एक काल हिब्रू व्याकरण का हर सवाल हल कर देता है। उत्पत्ति 2:5 में भी बारिश और खेती से जुड़ी खास वनस्पति की बात है। उससे पूरे ग्रह पर किसी भी तरह का पौधा न होने का निष्कर्ष जरूरी नहीं। [3]
सवाल यह है कि मेल बैठाने का अर्थ भाषा और संदर्भ से निकलता है या केवल विरोधाभास से बचने के लिए चुना गया है। अनुवाद में व्याख्या आ सकती है। वह घटना का एक और स्वतंत्र प्राचीन गवाह नहीं बन जाता।
मैं कहूँगा: पहले पद, अनुवाद की टिप्पणियाँ और सामने रखी व्याख्या साथ पढ़ लेते हैं। उसके बाद विज्ञान पर आएँगे। उचित अर्थ को छिपाकर की गई आलोचना कमजोर होती है। मुझे मजबूत और ईमानदार आलोचना चाहिए।
05वंशावली खुद दिनांकित चट्टान नहीं है।
परिवार की सूची और भौतिक माप का काम अलग है।
उत्पत्ति 5 में पुरखों की उम्र और उनकी संतानों का क्रम है। दूसरे पदों के साथ इन्हें जोड़कर मानवता और सृष्टि की छोटी समय-रेखाएँ बनाई गई हैं। लेकिन इस अध्याय में धरती बनने की आधुनिक कैलेंडर वाली तारीख नहीं छपी। [4]
पहले पूछिए कि गणना किस पाठ, शुरुआती बिंदु और मान्यताओं पर बनी है। क्या हर पीढ़ी लगातार मानी गई है? क्या सृष्टि के दिन सामान्य दिन हैं? किसी एक गणना को सभी यहूदियों और ईसाइयों की राय मत बनाइए।
अब भौतिक अभिलेख से तुलना कीजिए। भाग 6 में रेडियोधर्मी घड़ियाँ और दूसरी जाँच समझाई थीं। यहाँ बर्फ और झील के ऐसे क्रम देखेंगे जिनमें केवल कुछ हजार साल की धरती से कहीं अधिक समय निकलता है। [8] [9] [10]
दिक्कत वैज्ञानिकों को वंशावली नापसंद होने की नहीं है। छोटी समय-रेखा को मापे गए क्रम और उनकी अनिश्चितता समझानी होगी। कुछ तारीखें खिसकाने या कुछ पीढ़ियाँ जोड़ने से हजारों मौसमी चक्रों का हिसाब अपने आप नहीं बनता।
अगर सामने वाला पुरानी धरती मानता है, तो मैं उसके खिलाफ नई धरती वाली बहस नहीं चलाऊँगा। वह असहमति खत्म होती है। वंशावली ईश्वर से आई होने का अलग दावा अब भी अपना प्रमाण माँगता है।
06सूरज से पहले पौधे?
दिन लंबे करने से घटनाओं का क्रम अपने आप नहीं बदलता।
उत्पत्ति 1:11-19 में बीज वाले पौधे और फलदार पेड़ तीसरे दिन आते हैं। दो बड़ी ज्योतियाँ और तारे चौथे दिन आते हैं। यहाँ जाँची जा रही व्याख्या इन्हें संसार के भौतिक निर्माण की लगातार घटनाएँ मानती है। [2]
नासा का विवरण बताता है कि सिकुड़ते गैस-धूल के बादल के केंद्र में सूरज बना। बची सामग्री का बड़ा हिस्सा ग्रहों और दूसरी वस्तुओं में गया। इसमें पहले से वनस्पति वाली धरती सूरज के बनने का इंतजार नहीं करती। [5]
कोई कह सकता है कि सूरज पहले था, चौथे दिन धरती से दिखाई देने लगा। अब दावा बनने से बदलकर दिखाई देने का हो गया। उस अर्थ के लिए पाठ और भौतिक हालात का आधार चाहिए। कोई बात सोच पाना उसके घटने का प्रमाण नहीं।
दूसरा जवाब दिनों को साहित्यिक व्यवस्था मानता है। NABRE की टिप्पणी पहले तीन और बाद के तीन दिनों के आपसी संबंध बताती है। इससे कथन की बनावट समझी जा सकती है। वह आधुनिक खगोलशास्त्र की समय-सारणी नहीं बन जाती। [2]
मेरा जवाब है: समय बढ़ाने से क्रम उलटा नहीं होता। प्रतीकात्मक अर्थ एक असफल वैज्ञानिक समय-सारणी से बच सकता है। फिर उसी समय-सारणी को वैज्ञानिक भविष्यवाणी या अलौकिक स्रोत का स्वतंत्र प्रमाण नहीं कहा जा सकता।
07दो लोगों के बारे में कौन-सा दावा?
साझे पुरखे होना और अकेले जैविक स्रोत होना अलग है।
उत्पत्ति 2 में आदमी जमीन की मिट्टी से और स्त्री उसके शरीर की बगल से बनाई जाती है। एक प्रचलित शाब्दिक दावा है कि सारे मनुष्यों का जैविक आरंभ केवल इसी जोड़े से हुआ, आसपास कोई दूसरी मानव आबादी नहीं थी। [3]
भाग 11 में हाल के ऐसे अकेले जोड़े वाले आरंभ से जुड़े जीवाश्म, जीनोम और आबादी के तर्क जाँचे थे। भाग 8 में विरासत के आनुवंशिक पैटर्न देखे थे। उस जैविक प्रमाण का जवाब केवल आदम-हव्वा का नाम दोहराना नहीं है।
दूसरी व्याख्या कहती है कि जोड़ा दूसरे लोगों के बीच रहा और उसे खास आध्यात्मिक भूमिका मिली। यह अलग दावा है। कोई साझा वंशगत पुरखा हो सकता है, जबकि वही सबके DNA का अकेला स्रोत न हो। भाग 11 में यह फर्क समझाया है।
मैं यह नहीं कह सकता कि आनुवंशिकी ने किसी भी जोड़े की हर संभव धार्मिक भूमिका गलत कर दी। लेकिन जिस भूमिका का पहचानने योग्य जैविक असर बताया ही नहीं गया, उसे आनुवंशिकी ने प्रमाणित भी नहीं किया। संभव मेल और पुष्टि अलग हैं।
मैं पूछूँगा: क्या वे अकेले दो मनुष्य थे, बड़ी आबादी में साझा पुरखे थे या मानवता के प्रतीक थे? दावा तय किए बिना हर प्रमाण के बाद कथा बदलती रहेगी। फिर असली बात की जाँच कभी नहीं होगी।
08पूरी कहानी चालीस दिन की नहीं है।
पानी, बचे लोगों और अवधि को साफ समझिए।
उत्पत्ति 7:19-23 में पहाड़ ढकने और जहाज के बाहर सूखी जमीन पर साँस लेने वाले जीवों के मरने का वर्णन है। अध्याय 8 में पानी उतरता है, पक्षी भेजे जाते हैं और आखिर जमीन सूखती है। कथा केवल बारिश के चालीस दिनों तक नहीं चलती। [6] [7]
यहाँ जाँचा जा रहा दावा हाल की ऐसी बाढ़ है जिसने पूरा ग्रह ढका, बाहर के मनुष्यों और जमीन के जानवरों को खत्म किया, फिर जहाज से आबादी फैली। किसी इलाके में भयंकर बाढ़ आना इससे बहुत छोटा दावा है।
मैं मछलियों को जहाज में न लेने पर मजाक बनाकर आलोचना नहीं करूँगा। विनाश के विवरण में सूखी जमीन पर साँस लेने वाले जीव आते हैं। हर जानवर का हमेशा बस एक जोड़ा बताने का दावा भी अधूरा है; शुद्ध माने गए पशुओं की गिनती अलग है। [6]
कुछ आस्थावान इसे पूरे संसार वाली भाषा में कही क्षेत्रीय विपदा मानते हैं। कुछ इसे दंड और नए आरंभ की धार्मिक कथा समझते हैं। इन अर्थों को उसी रूप में जाँचना होगा। क्षेत्रीय बाढ़ का प्रमाण वैश्विक बाढ़ प्रमाणित नहीं करता।
मेरा सीधा जवाब है: बड़ी बाढ़ आती है, लेकिन उसका फैलाव मायने रखता है। एक घाटी में पानी मिलने से उसी घाटी का दावा मजबूत होता है। पूरे ग्रह के लिए पूरे ग्रह का मामला चाहिए।
09पूरी धरती की बाढ़ क्या बदलेगी?
इतनी बड़ी घटना को खोई हुई चप्पल की तरह नहीं जाँच सकते।
सामान्य भौतिक प्रक्रियाओं से हर पहाड़ ढकने वाली बाढ़ का जमीन, तलछट, जीव-जगत और पुराने अभिलेखों पर असर होना चाहिए। अगर अधिकतर जीवाश्म वाली परतें उसी घटना की बताई जाएँ, तो उनके बनने के क्रम और समय का भी हिसाब चाहिए।
हर जगह एक जैसी दिखती परत माँगना ठीक नहीं। कटाव और अलग वातावरण में अलग तरह के जमाव बनते हैं। असली सवाल है कि प्रस्तावित बाढ़ वास्तविक क्रम को समझाती है या नहीं, खासकर जहाँ बार-बार बदलते मौसम के निशान बचे हों।
बर्फ और झील की परतें किसी धार्मिक कहानी की दो नकलें नहीं हैं। वे अलग प्रक्रियाओं से बने भौतिक अभिलेख हैं। उनकी तारीखों में व्याख्या और आपसी जाँच आती है। सुंदर ग्राफ देखकर मान लेने की जरूरत नहीं; तरीका पढ़ सकते हैं। [8] [9] [10]
कसौटी शर्त के साथ है। सामान्य प्रक्रियाओं से हाल में आई वैश्विक बाढ़ को इन अभिलेखों से मेल खाना होगा। अगर ईश्वर ने इन्हें चमत्कार से बचाया या दोबारा बनाया, तो अब अलग व्याख्या और उसके प्रमाण का सवाल है।
साथ देखने से पहले तारीख का दायरा और अपेक्षित असर तय कीजिए। वरना हर अनुकूल जमाव बाढ़ का प्रमाण और हर प्रतिकूल जमाव अपवाद बन जाएगा। हर संभव नतीजे में बचने वाला दावा बहुत कम समझाता है।
10हर तूफान एक साल नहीं होता।
मौसमी चक्र, संदिग्ध परत और दूसरी घड़ियों की तुलना देखिए।
आइस कोर बर्फ में ड्रिल करके निकाला गया लंबा बेलन है। उसमें जमी बर्फ के भौतिक और रासायनिक गुण बदलते हैं। मौसम के साथ दोहराते बदलाव साल की परत पहचानने में मदद करते हैं। हर दिखती लकीर को साल मान लेना इसका तरीका नहीं।
स्वेन्सन और साथियों ने GICC05 समय-रेखा लगभग 60,000 साल तक बढ़ाई। एक जलवायु-परिवर्तन वर्ष 2000 से करीब 59,400 साल पहले आया; बताई अनिश्चितता करीब 1,300 साल है। बारीक माप, संदिग्ध परतों और दूसरी समय-रेखा से मतभेद का हिसाब रखा गया। [8]
क्या एक साल में कई तूफान कई परतें बना सकते हैं? हाँ। इसीलिए अलग गुणों में सालाना चक्र पहचानना जरूरी है। धुँधले हिस्से, गहराई में पतली हुई परतें और पहचान योग्य दूसरे निशान भी देखे जाते हैं। केवल शीर्षक से फैसला मत कीजिए।
इसका मतलब तारीख में शून्य गलती नहीं है। ग्रीनलैंड और गुफा के मौसम-संबंधी बदलाव मिलाते समय यह मानना पड़ता है कि संबंधित घटनाएँ साथ हुईं। लेख उस शर्त को बताता है। अनिश्चितता विवरण का हिस्सा है। [8]
मैं कहूँगा: छोटी समय-रेखा इन दोहराते मापों और पहचान वाले निशानों को साथ कैसे समझाती है? गलती संभव कहना, पूरा अभिलेख कुछ हजार साल में समेटने वाला मॉडल नहीं देता। जिस गलती का संदेह है, उसे दिखाना होगा।
11यहाँ वैज्ञानिकों ने सुधार भी किए हैं।
जहाँ सालाना परत नहीं बची, वहाँ अनुमान की बात छिपनी नहीं चाहिए।
जापान की सुइगेत्सु झील में तलछट और जमीन के पौधों के अवशेष बचे हैं। ब्रॉन्क रैम्ज़ी और साथियों ने लगभग 11,200 से 52,800 साल पहले तक रेडियोकार्बन की तुलना बढ़ाई। यहाँ पहले का शुरुआती वर्ष 1950 है। यह धरती बनने की कार्बन डेटिंग नहीं। [9]
श्लोलाउट और साथियों के बाद के अध्ययन ने मौसमी परतों की समय-रेखा सुधारी। जाँचे गए अंतराल में लगभग आधे वर्षों की मौसमी परतें ही पहचान में आती थीं। बाकी के लिए बताए गए तरीके से गायब चक्रों का अनुमान जोड़ा गया। [10]
यह बात मायने रखती है। किसी से मत कहिए कि पचास हजार एकदम सही धारियाँ बिना किसी मान्यता के गिन ली गईं। संशोधित अध्ययन संरक्षण की दिक्कत और अनिश्चितता बताता है। धर्म पर सख्त होने से विज्ञान की गलत तस्वीर बेचने की छूट नहीं मिलती।
झील के आँकड़े और उन्हीं को इस्तेमाल करने वाली सुधार-सारणी पूरी तरह स्वतंत्र दो प्रमाण भी नहीं हैं। कुछ जानकारी साझा है। मजबूत समझ यह बताएगी कि क्या मापा, क्या अनुमान लगाया और कहाँ दूसरे अभिलेख से तुलना हुई।
मेरा निष्कर्ष सीमित है: ये लंबे अध्ययन किए गए क्रम हाल की धरती और सामान्य प्रक्रियाओं वाले हाल के वैश्विक विनाश के लिए गंभीर समस्या हैं। प्रतिद्वंद्वी समय-रेखा को अवलोकन समझाने होंगे। अनुमान शब्द बोल देने से वास्तविक तलछट गायब नहीं होती।
12पानी था। लेकिन कब?
सीप पर यह नहीं लिखा होता कि वह नूह की बाढ़ में आई।
कोई पहाड़ पर समुद्री जीवाश्म दिखाकर कहता है: यहाँ पानी जरूर रहा होगा। यह बात सही हो सकती है। असहमति इस पर है कि सामग्री कब जमी और अपनी आज की ऊँचाई तक कैसे पहुँची।
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण हिमालय को भारतीय और यूरेशियाई भूखंडों की टक्कर से समझाता है। पुराने वातावरण में जमी चट्टानें मुड़ीं और ऊपर उठीं। उसका विवरण क्षेत्र के जीवाश्म और बदलते वातावरण पर भी बात करता है। पुराने समुद्री जमाव पहाड़ी चट्टान बन सकते हैं। [11]
समझने के लिए सोचिए: पुराना समुद्रतल ऊपर उठे तो उसमें दबी सीप भी ऊपर जाएगी। यह प्रक्रिया की आसान तस्वीर है, उसका पूरा प्रमाण नहीं। प्रमाण में चट्टानों के संबंध, मुड़ना और प्लेटों की गति का इतिहास आते हैं।
बाढ़ के समर्थक को इस व्याख्या की तुलना अपने स्पष्ट मॉडल से करनी होगी। अकेली सीप हाल का एक पानी-स्तर, एक वैश्विक घटना या खास बाइबली कथा की तारीख नहीं बताती। अलग इतिहासों में भी पानी हो सकता है।
मेरा जवाब है: समुद्री वातावरण का प्रमाण स्वीकार है। अब जीवाश्म की उम्र और चट्टान के संदर्भ से दिखाइए कि आपकी घटना पुराने जमाव के ऊपर उठने से बेहतर व्याख्या क्यों है। वस्तु मिल गई है; उसका इतिहास अभी समझना है।
13ईश्वर जहाज को बचा सकता था।
संभव होने से घटना का ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं मिल जाता।
अगर कथा हाल में हुए पूरे ग्रह के नए आरंभ की है, तो पूछना होगा कि आबादियाँ कैसे फैलीं और जीवन-तंत्र कैसे बने। भूगोल, भोजन, पौधों, प्रजनन और उपलब्ध समय का हिसाब चाहिए। जहाज में जगह होना अकेला सवाल नहीं। [6] [7]
आस्थावान कह सकता है कि ईश्वर जानवर लाया, उन्हें जीवित रखा और फिर सही जगह पहुँचाया। सामान्य पशु-देखभाल कठिन होती, इतना कहकर मैं चमत्कार का तार्किक खंडन नहीं कर सकता। दावा ही सामान्य सीमा के बाहर मदद का है।
लेकिन अब प्रमाण का काम बदल गया। हमें यह मानने की वजह चाहिए कि वे हस्तक्षेप हुए थे। कथा बचाने के लिए जितने चाहे चमत्कार सोच लेना उनमें से किसी का अवलोकन नहीं है। यही तरीका परस्पर विरोधी कथाएँ भी बचा सकता है।
मैं बाइबल के जीव-प्रकारों की मनमानी संख्या बनाकर गणना को अंतिम फैसला नहीं कहूँगा। प्रस्तावित प्रकार की परिभाषा, सदस्यता का आधार और बाद का संभव इतिहास बताना होगा। हर मुश्किल पर श्रेणी बदलना जाँच रोक देता है।
मेरा जवाब है: असीम ईश्वर के लिए संभव और प्रमाण से समर्थित, अलग बातें हैं। हर प्रतिकूल निशान को अदृश्य मरम्मत से समझाएँगे, तो बताइए कि इस कथा के सच होने का कौन-सा सकारात्मक आधार बचता है।
14कई कहानियाँ कई माप नहीं हैं।
पानी के साथ कथाओं के फैलने का इतिहास भी जाँचना होगा।
ब्रिटिश संग्रहालय में गिलगमेश की ग्यारहवीं तख्ती का लिखावट वाला टुकड़ा है। उसमें मेसोपोटामियाई बाढ़-कथा पहचानी गई है। यह वास्तविक प्राचीन वस्तु है। इसे आधुनिक लोगों ने बाइबल से चिढ़कर नहीं बनाया। संग्रहालय की सूची उसकी पहचान देती है। [12]
उत्पत्ति 8 में बाहर की स्थिति जानने के लिए पक्षी भेजे जाते हैं। NABRE की टिप्पणी गिलगमेश के पक्षियों वाले क्रम से तुलना करती है। समानता पुरानी कथाओं का माहौल समझाती है। इससे अकेले एक वैश्विक भौतिक विपदा तय नहीं होती। [7]
एक व्याख्या वास्तविक बाढ़ की साझा याद हो सकती है। दूसरी कथाओं का फैलना और रूप बदलना, या अलग जगहों पर विनाशकारी बाढ़ का अनुभव हो सकता है। ये मिल भी सकती हैं। समानता से उधार लेने की दिशा या लेखन की सटीक तारीख अपने आप नहीं निकलती।
तख्ती की उम्र उस बची हुई प्रति का प्रमाण है। वह आवश्यक रूप से कहानी का जन्मदिन नहीं है। उससे पहले के हर मौखिक चरण की जानकारी भी नहीं मिलती। वस्तु, कथा और बताई गई घटना को अलग समझिए।
मेरा जवाब है: कई परंपराएँ तुलना लायक हैं, लेकिन स्वतंत्र वर्षामापी नहीं हैं। पहले तारीखें, आपसी संबंध और भूगोल के प्रमाण दिखाइए। बार-बार कही गई कहानी को भी घटना के स्तर पर जाँचना पड़ता है।
15कहानी भाषा-वंश का शोध नहीं है।
एक अप्रमाणित निश्चितता की जगह दूसरी मत रखिए।
उत्पत्ति 11:1-9 में एक भाषा, नगर, ऊँची मीनार, ईश्वर द्वारा बोली उलझाना और लोगों का फैलना आता है। शाब्दिक दावा भाषा-विविधता के पीछे खास दैवी हस्तक्षेप का है। यह भाषाओं की तुलना का दिनांकित अध्ययन नहीं है। [14]
उत्पत्ति 10 में लोग अपनी भाषाओं के अनुसार पहले ही समूहों में हैं। समर्थक अध्याय 11 को पीछे लौटकर उस विविधता का कारण बताने वाली कथा पढ़ सकता है। केवल अध्याय-क्रम को निर्णायक विरोधाभास कहना ठीक नहीं होगा। [13] [14]
NABRE की टिप्पणी मीनार को बाबुल के मंदिरों की ऊँची मीनारों से जोड़ती है और कथा का शब्द-खेल समझाती है। इससे साहित्यिक और सांस्कृतिक संदर्भ मिलता है। ऐसी मीनार मिलना ईश्वर द्वारा भाषा बिगाड़ने की अलग पुष्टि नहीं करेगा। [14]
मैं यह दावा नहीं कर रहा कि भाषाविज्ञान ने पहली मानव भाषा ठीक-ठीक बता दी या भाषा के पूरे अतीत में हर संभव हस्तक्षेप निकाल दिया। वह बढ़ा हुआ दावा होगा। यहाँ खास बाबेल घटना को इतिहास मानने का पर्याप्त स्वतंत्र प्रमाण नहीं मिला।
मेरा जवाब है: समुदाय, समय और भाषा-परिवर्तन को उस हस्तक्षेप से जोड़ने वाला प्रमाण दिखाइए। कई भाषाओं का होना वही बात है जिसे कहानी समझाना चाहती है। उसी बात से कहानी की व्याख्या अपने आप सही नहीं हो जाती।
16कितने लोगों के निकलने का दावा है?
छह लाख पुरुष कहना आबादी का दावा भी है।
निर्गमन 12:37 में आश्रितों के अलावा लगभग छह लाख पुरुष पैदल निकलते हैं। अध्याय 14 में समुद्र पार करना और पीछा करती सेना का विनाश है। विशाल वास्तविक पलायन मानने पर आबादी और घटनाओं की जाँच होगी, केवल मुक्ति के धार्मिक अर्थ की नहीं। [15] [16]
पुरुषों की संख्या को पूरी यात्रा करती आबादी मत समझिए। महिलाएँ, बच्चे और दूसरे लोग उसे बढ़ाएँगे। मैं कुल संख्या एकदम तय नहीं बनाऊँगा, क्योंकि उसके लिए परिवारों की बनावट के बारे में और मान्यताएँ चाहिए। पद वह हिसाब नहीं देता।
इतना बड़ा समूह और थोड़े भागे मजदूर एक जैसे निशान नहीं छोड़ेंगे। भोजन, पड़ाव और रास्ते के सवाल दावे के आकार पर पूछने होंगे। बहुत सटीक कुल संख्या न मानने से आकार की मूल समस्या खत्म नहीं होती।
कुछ जवाब हिब्रू संख्या वाले शब्द का अर्थ बदलते हैं। कुछ संख्याओं को साहित्यिक बढ़ोतरी मानते हैं। दोनों की जाँच हो सकती है, लेकिन आसपास के पूरे संख्यात्मक विवरण से मेल दिखाना होगा। फार्बर कुल या दल वाले अर्थ की कठिनाइयाँ बताते हैं। [17]
मेरा प्रश्न है: मूल बड़ी संख्या, छोटा पलायन या धार्मिक कथा, आप किसका बचाव कर रहे हैं? तीनों का प्रमाण अलग होगा। छोटे समूह की संभावना पूरी विशाल कथा और हर चमत्कार की पुष्टि नहीं बन सकती।
17क्या मिस्र अपनी हार लिखता?
राजा की चुप्पी और पूरा पुरातात्त्विक सवाल एक बात नहीं हैं।
कोई कहता है कि मिस्र के शासक अपनी बेइज्जती का प्रचार क्यों करते। चुनिंदा अभिलेखों पर यह उचित सावधानी है। हार स्वीकारने वाला लेख न मिलने से हर संभव भागने की घटना या सैन्य विपदा गलत नहीं हो जाती।
लेकिन लिखित रिकॉर्ड अकेला प्रमाण नहीं है। विशाल जनसमूह के दावे में बस्तियाँ, क्षेत्रीय आबादी और वस्तुओं के निशान भी आते हैं। फार्बर बड़ी संख्या की आलोचना करते हैं। फ्रीडमन बहुत छोटे ऐतिहासिक समूह का बचाव करते हैं। [17] [18]
हर पड़ाव और सामान नहीं बचता। घूमते लोगों के निशान हल्के हो सकते हैं, खुदाई अधूरी होती है। ईमानदार आपत्ति बताएगी कि जिस जगह और समय की जाँच हुई, वहाँ इस घटना का कौन-सा निशान मिलना चाहिए था। हर अनुपस्थिति समान प्रमाण नहीं।
समझने के लिए एक पैदल यात्री और फुटबॉल की भीड़ सोचिए। एक टिकट न मिलने से अकेले आदमी पर कम बात बनती है। पूरी बताई गई भीड़ के अपेक्षित निशान न मिलना ज्यादा मायने रख सकता है। उदाहरण खुदाई का विकल्प नहीं है।
मैं कहूँगा: मान लिया कि राजा चुनकर लिखते हैं। अब बताए गए आकार की घटना का सकारात्मक आधार दिखाइए। एक गायब रिकॉर्ड की वजह बताने से समुद्र खुलना, पूरी यात्रा और खास जनगणना स्थापित नहीं होती।
18क्या कोई छोटा समूह निकला होगा?
परंपरा का संभव बीज पूरी कथा की पुष्टि नहीं है।
रिचर्ड एलियट फ्रीडमन पूरे बाद के इस्राएल की जगह लेवी समूह के निर्गमन का तर्क देते हैं। वे पाठ की खासियतों, नामों और धार्मिक परंपराओं से बात बनाते हैं। यह विद्वान का इतिहास-पुनर्निर्माण है, निकलते लोगों की तस्वीर नहीं। [18]
संभावना को गंभीरता से लेना चाहिए। मैं यह नहीं कह सकता कि पुरातत्व ने इस्राएल से जुड़े हर व्यक्ति का मिस्र से निकलना असंभव कर दिया। विशाल संख्या की अपेक्षा छोटा पलायन पहचानना बहुत कठिन हो सकता है।
लेकिन छोटे पुनर्निर्माण की भी मान्यताएँ और विवादित कदम हैं। मिस्र से जुड़े संकेत उपयोगी हो सकते हैं, फिर भी वे केवल एक पलायन ही नहीं सुझाते। हर विवरण कितना समझाता है और दूसरे इतिहास से कैसे बन सकता है, यह जाँचना होगा।
छोटे समूह का निकलना स्थापित हो भी जाए, तो विपत्तियाँ, वर्णित समुद्र-पार यात्रा और किताब का दैवी स्रोत प्रमाणित करने के लिए और काम चाहिए। ऐतिहासिक बीज का होना उसके आसपास बढ़ी हर शाखा को सही नहीं कर देता।
मेरा जवाब है: छोटे आधार की संभावना जाँचने लायक है। वह न अपने आप गलत है, न पूरी निर्गमन-कथा सही हो गई है। जितना प्रमाण मिले, उतना मानूँगा। जहाँ उसका साथ खत्म होगा, वहीं निष्कर्ष भी रोकूँगा।
19बाइबल के बाहर भी इस्राएल आता है।
सकारात्मक खोज को स्वीकार कीजिए, बढ़ाकर मत बेचिए।
मेर्नेप्ता का शिलालेख मिस्र के राजा का अभिलेख है, जिसमें इस्राएल का उल्लेख है। हेज़ल का अध्ययन इसे लगभग 1207 ईसा पूर्व रखता है और नाम तथा कनान वाले भूगोल का अर्थ जाँचता है। यह बाइबल के बाहर का प्रमाण है। [19]
इससे जरूरी ऐतिहासिक आधार मिलता है: उस समय तक क्षेत्र में इस्राएल नाम से पहचाना गया समूह जाना जाता था। इस्राएल की शुरुआत समझाने वाले इतिहास को इसका ध्यान रखना होगा। नास्तिक को भी नारे के लिए इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए।
शिलालेख नहीं कहता कि यह समूह मूसा के साथ बीच से खुले समुद्र से निकला था। किसी समुदाय के होने का प्रमाण उसकी उत्पत्ति की हर खास कथा का प्रमाण नहीं होता। उस अतिरिक्त जोड़ का अपना आधार चाहिए।
राजा का विजय-लेख निष्पक्ष आधुनिक जनगणना भी नहीं है। उसकी भाषा सत्ता का काम करती है। हेज़ल इसी पाठ और बताए गए समूह की व्याख्या जाँचते हैं। वस्तु और उस पर बनी व्याख्या दोनों देखने योग्य रहने चाहिए।
मेरा जवाब है: हाँ, यह कनान में शुरुआती इस्राएल का आधार देता है। इससे अकेले इस्राएल के बारे में हर बाइबली बात स्थापित नहीं होती। सीमित नतीजा अपने आप रोचक है। उसे खींचकर चमत्कार बनाने की जरूरत नहीं।
20जला अनाज हमलावर का नाम नहीं बताता।
यहोशू से जोड़ने से पहले सही विनाश-परत की तारीख समझिए।
यरीहो में सवाल केवल पुराना नगर होने का नहीं है। कौन-सी बसावट, दीवार और विनाश किस समय के हैं? क्या वही खास विजय-कथा स्थापित होती है? अलग परतों को एक घटना नहीं मान सकते।
ब्रुइन्स और वान डर प्लिख्ट ने केन्यन की खुदाई के जले अनाज और लकड़ी के कोयले मापे। उनके 1995 के लेख में जाँचा गया मध्य कांस्य युग का विनाश ईसा पूर्व सत्रहवीं सदी के आखिरी हिस्से या सोलहवीं सदी में आया। सुधार-सारणी की सीमाएँ भी थीं। [20]
अनाज उपयोगी है क्योंकि जलते समय पुरानी शहतीर की लकड़ी पहले से सदियों पुरानी हो सकती है। अनाज की तारीख उसके उगने के करीब पहुँचती है। फिर भी नमूना किस परत से जुड़ा है, दूषण और आग का विनाश से रिश्ता जाँचना होगा।
ब्रायंट वुड पुरातात्त्विक व्याख्या से लगभग 1400 ईसा पूर्व का पक्ष रखते हैं। उनके बर्तन और समय-संबंधी तर्क जाँचे जाने चाहिए। 1995 के नतीजे उस पहचान के खिलाफ जाते हैं। उनसे यह नहीं निकलता कि यरीहो में बाद की कोई बसावट थी ही नहीं। [20] [21]
मेरा जवाब है: दिनांकित परत और यहोशू की घटना से उसका जोड़ दिखाइए। तारीख हमलावर का नाम, तुरही का चमत्कार या हर पुरातात्त्विक विवाद तय नहीं करती। पूछिए कि ठीक संदर्भ वाला नया नमूना आने पर क्या बदलेगा।
21दाऊद और पीलातुस को ठीक से समझिए।
ऐतिहासिक संदर्भ सही हो सकता है, जबकि चमत्कार का प्रमाण बाकी हो।
तेल दान शिलालेख में दाऊद के राजवंश का उल्लेख मिलता है। यह ईसा पूर्व नौवीं सदी का है। ज्यूइश म्यूजियम की प्रदर्शनी मूल वस्तु और उसे उधार देने वाले इस्राएल संग्रहालय की जानकारी देती है। यह बाइबल से बाहर का राजवंशीय संकेत है। [22]
इससे दाऊद की समकालीन पूरी जीवनी या राज्य का आकार नहीं मिलता। राजवंश का नाम असली प्रमाण हो सकता है, जबकि संस्थापक, राजनीतिक ताकत और उससे जुड़ी कथाओं पर कई सवाल खुले रहें। सीमित होना बेकार होना नहीं है।
इस्राएल संग्रहालय में पोंतियुस पीलातुस वाला शिलालेख भी प्रदर्शित है। वह ऐतिहासिक अधिकारी से जुड़ी भौतिक वस्तु है। उससे किसी मरे व्यक्ति के फिर जीवित होने का वैज्ञानिक प्रदर्शन नहीं मिलता। वह अलग दावा है। [23]
टैसिटस अपने Annals 15.44 में तिबेरियुस के शासन और पीलातुस के समय ख्रिस्तुस की हत्या की सूचना देता है। वह बाहरी रोमन लेखक है, घटना का प्रत्यक्षदर्शी नहीं। उसका पाठ ऐतिहासिक संदर्भ का आधार है; पुनरुत्थान की स्वतंत्र रिपोर्ट नहीं। [30]
मैं कहूँगा: इन स्रोतों से जितना निकलता है, स्वीकार करें। विकल्प केवल पूरी बाइबल सच या हर पात्र काल्पनिक नहीं हैं। असली लोगों के बारे में कथाएँ बढ़ सकती हैं। खास हस्तक्षेप को खास प्रमाण चाहिए।
ग्राफइस प्रमाण से क्या स्थापित होता है?
मिली चीज और उससे बड़ा दावा अलग कदम हैं।

नाम, दिनांकित नमूना और रिपोर्ट, तीनों उपयोगी प्रमाण हैं। उपयोगिता सवाल पर निर्भर है। आगे का पुनर्निर्माण जोड़ने से पहले हर प्रमाण का सीमित निष्कर्ष समझना होगा।
बड़े निष्कर्ष तक जाने के लिए गायब कड़ी पहचानें और उसका प्रमाण दें। राजवंशीय नाम हर राजवंशीय कथा सही नहीं करता। नमूना हमलावर नहीं बताता। अकेली रिपोर्ट दैवी कारण अलग नहीं कर देती।
दोनों भाषाओं वाली प्रमाण-जाँच सूची डाउनलोड करें
22हेरोद और जनगणना आसानी से नहीं मिलते।
दो ऐतिहासिक समयों का जोड़ खास मुश्किल पैदा करता है।
मत्ती 2 में यीशु का जन्म हेरोद के शासन में होता है। लूका 2 पंजीकरण को सीरिया में क्विरिनियुस के शासन से जोड़ता है। NABRE की टिप्पणियाँ हेरोद की मृत्यु 4 ईसा पूर्व और संबंधित शासन तथा यहूदिया की जनगणना 6-7 ईस्वी बताती हैं। [24] [25]
सीधी रेखा पर रखिए: पहले हेरोद की मृत्यु, लगभग दस साल बाद जनगणना। एक जन्म पहले बिंदु से पहले भी हो और दूसरे बिंदु पर भी, यह साधारण क्रम में नहीं बैठता। समस्या कैलेंडर अलग होने का मजाक नहीं, इन पहचाने गए समयों का मेल है।
जोसीफस बताता है कि यहूदिया के सीधे रोमन प्रशासन में आने के बाद क्विरिनियुस संपत्ति के आकलन के लिए पहुँचा। इससे उस जनगणना का संदर्भ मिलता है। जोसीफस भी जाँचने योग्य इतिहासकार है, नई अचूक धर्मपुस्तक नहीं। [26]
इससे यीशु के जन्मदिन की सटीक तारीख नहीं मिलती। प्रस्तावित ऐतिहासिक संदर्भों में तनाव दिखता है। NABRE की अपनी टिप्पणी मुश्किल स्वीकार करती है। इसे पहचानने के लिए ईसाई धर्म का विरोधी होना जरूरी नहीं। [25]
मेरा जवाब है: कौन-सी जनगणना, उसकी तारीख और प्रशासन का आधार बताइए। कभी कोई जनगणना हुई थी, इतना काफी नहीं। कथा के लिए जरूरी शासक, जगह और समय भी मिलने चाहिए।
23क्या कोई पहले की जनगणना थी?
संभव सुधार को भी अपना प्रमाण देना होगा।
जवाबों में क्विरिनियुस की पहले की भूमिका, कोई अलग पंजीकरण या उसके शासन से पहले वाला अनुवाद सुझाया जाता है। ये समय की मुश्किल हटाने की कोशिशें हैं। केवल आस्थावान ने सुझाया, इसलिए इन्हें खारिज करना ठीक नहीं।
लेकिन पहले की कोई सरकारी भूमिका होने से खास जनगणना, उसकी तारीख और यूसुफ की यात्रा स्थापित नहीं होती। अनुवाद को यूनानी भाषा और संदर्भ में बैठना होगा। एक कदम की संभावना बाकी कदमों का प्रमाण नहीं बनती।
NABRE की टिप्पणी पहले के गवर्नर पद की संभावना पर बात करके उससे पैदा दूसरी समय-संबंधी दिक्कत बताती है। वह रोमन नागरिकों के पंजीकरण और लूका के सरल अर्थ से निकलती पूरी साम्राज्यीय गिनती में भी फर्क करती है। [25]
इसका मतलब यह नहीं कि कोई भूली प्रशासनिक कार्रवाई कभी हो ही नहीं सकती। सीमित निष्कर्ष है कि यहाँ पक्का ऐतिहासिक मेल स्थापित नहीं हुआ। अनजान रिकॉर्ड संभव रह सकता है; उसे हमारे पास मौजूद रिकॉर्ड नहीं गिन सकते।
मैं कहूँगा: दस्तावेज और भाषा का तर्क दिखाइए। सही समय वाला मेल खाता पंजीकरण स्थापित हुआ तो आलोचना बदलूँगा। प्राचीन शासन की हर बात न जानना किसी प्रस्तावित बचाव को स्थापित इतिहास नहीं बना देता।
24शुरुआती गवाही क्या कहती है?
ईसाई धर्म के जरूरी दावे को समझकर परखिए।
1 कुरिन्थियों 15:3-8 में पौलुस यीशु की मृत्यु, दफनाए जाने, पुनरुत्थान और दिखाई देने की परंपरा आगे देता है। सूची में कैफा, बारह शिष्य, बड़ा समूह, याकूब और खुद पौलुस आते हैं। यह शुरुआती ईसाई विश्वास का स्रोत है, आधुनिक अफवाह नहीं। [27]
पौलुस मिली हुई बात और सूची में अपनी जगह में फर्क रखता है। इससे पूछ सकते हैं कि कौन-सी बात उसका निजी दावा है और कौन-सी आगे मिली परंपरा। पुराना अंश बचने से हर बताए व्यक्ति का अलग हस्ताक्षरित बयान नहीं मिल जाता।
मरकुस 16 में खाली कब्र का वर्णन है। उसका लंबा अंत, पद 9-20, अलग पाठ-इतिहास रखता है। NABRE की टिप्पणियाँ यह बताती हैं। छपी बाइबल में आने से बाद वाला अंत अपने आप एक और स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी नहीं बनता। [28]
इस फर्क से पुनरुत्थान का शुरुआती विश्वास गायब नहीं होता; पौलुस की चिट्ठी उसे बताती है। लेकिन जल्दी विश्वास बनना भी घटना का अकेला प्रमाण नहीं। पूछना होगा कि विश्वास बना कैसे और बची जानकारी व्याख्याओं में कितना फर्क कर पाती है।
मैं कहूँगा: प्राचीन गवाही महत्त्वपूर्ण है। अब लेखक की रिपोर्ट, उसका निजी अनुभव, मिली हुई परंपरा और बताया गया दैवी कारण अलग जाँचें। चारों को एक साथ प्रत्यक्षदर्शी प्रमाण कहने से जरूरी कदम छिप जाते हैं।
25एक रिपोर्ट पाँच सौ बयान नहीं है।
बयान में आई संख्या और बचे हुए बयानों की संख्या अलग है।
पौलुस पाँच सौ से अधिक लोगों को दिखाई देने की बात कहता है। वह लिखता है कि अधिकतर तब जीवित थे। समर्थक इसे ऐसा दावा मानता है जिसे कुछ समकालीन लोग चुनौती दे सकते थे। इस बात को हँसकर उड़ाना पर्याप्त जवाब नहीं। [27]
लेकिन हमारे पास उस समूह के बारे में पौलुस की रिपोर्ट है। पाँच सौ सुरक्षित रखे साक्षात्कार नहीं हैं। वाक्य के अंदर की संख्या गुणा करने से पाँच सौ स्वतंत्र विवरण पैदा नहीं होते। सवाल हमारे पास बचे प्रमाण का है।
अखबार कहे कि पाँच सौ ने कुछ देखा। हमारे पास खबर है। सहमति, स्वतंत्रता और दूसरे अर्थ जाँचने के लिए मूल गवाह और परिस्थितियाँ चाहिए होंगी। यह समझाने का उदाहरण है; पौलुस पर अखबारी धोखा चलाने का आरोप नहीं।
ईमानदारी और सही समझ भी अलग हैं। कोई अनुभव सच्चे मन से बताए, फिर भी उसका कारण समझने में गलती कर सकता है। मैं एक अनुच्छेद से हर प्राचीन व्यक्ति की मानसिक अवस्था नहीं बता सकता। अनुमान को खोजा हुआ तथ्य नहीं कहूँगा।
मेरा जवाब है: यह समूह को दिखाई देने की रिपोर्ट का प्रमाण है, अलग से जाँच सकने वाले पाँच सौ रिकॉर्ड नहीं। ज्यादा स्वतंत्र दर्ज गवाही मिलती तो आकलन बदलता। अकेली संख्या उन दस्तावेजों की कमी पूरी नहीं करती जो बचे ही नहीं।
26अगर पुनरुत्थान बेहतर व्याख्या हो?
केवल गलती की संभावना बोलकर तुलना से नहीं बच सकते।
विलियम लेन क्रेग दिखाई देने के अनुभवों, खाली कब्र और ईसाई विश्वास की शुरुआत को जोड़ते हैं। उनका तर्क है कि पूरी तस्वीर को पुनरुत्थान प्राकृतिक विकल्पों से बेहतर समझाता है। यह उनका सम्मिलित व्याख्या वाला पक्ष है। [29]
इस ढाँचे को असली जवाब चाहिए। लोग झूठ बोलते हैं कहकर निकलना मेरे लिए काफी नहीं। कौन-सी बातें स्थापित हैं, कौन विवादित हैं, स्रोत कहाँ जानकारी साझा करते हैं और हर व्याख्या बची रिपोर्टों से क्या अपेक्षा करती है, यह पूछना होगा।
खाली कब्र स्थापित हो तो उसमें शरीर न होने की बात मजबूत होगी। दैवी पुनरुत्थान तक पहुँचने में और कदम हैं। दिखाई देने समझे गए अनुभव महत्त्वपूर्ण हो सकते हैं, पर अकेले दैवी कारण अलग नहीं कर देते। उन कड़ियों का बचाव जरूरी है।
विश्वास रोकने के लिए मुझे एक पूरी तरह दर्ज वैकल्पिक कहानी गढ़नी जरूरी नहीं। अनसुलझे प्रमाण अनसुलझे रह सकते हैं। लेकिन चमत्कार से बचता है, इसलिए कोई विकल्प सही घोषित भी नहीं कर सकता। मेरा विकल्प भी भरोसे का आधार कमाएगा।
मेरा जवाब है: हर व्याख्या के प्रमाण और मान्यताओं की तुलना करें। एक विकल्प का खाली हिस्सा दूसरे का सकारात्मक प्रमाण अपने आप नहीं है। मैं अभी आश्वस्त नहीं कि उपलब्ध रिकॉर्ड पुनरुत्थान पर शुरुआती विश्वास से आगे अलौकिक घटना स्थापित करता है।
27अप्रमाणित का मतलब असंभव नहीं।
न मनमानी रोक, न धार्मिक छूट, प्रमाण की जगह ले सकती है।
इतिहास की घटनाएँ अक्सर दोबारा नहीं कर सकते। फिर भी स्रोत, भौतिक निशान, तारीखें, उद्देश्य और अलग पुनर्निर्माण जाँच सकते हैं। हर पुरानी घटना प्रयोगशाला में खुद दोहराने की शर्त धार्मिक इतिहास के साथ साधारण इतिहास भी मिटा देगी।
समर्थक कह सकता है कि ईश्वर हो तो पुनरुत्थान संभव है। इसे शर्त के साथ माना जा सकता है। इससे ईश्वर का होना, इस मामले में काम करना और उससे जुड़ी धर्म-व्याख्या का उसी ईश्वर को पहचानना स्थापित नहीं होता।
सामान्य अपेक्षा से बहुत बड़े बदलाव के लिए मजबूत प्रमाण माँगने को हर चमत्कार पर पहले से रोक लगाना जरूरी नहीं। प्रमाण ऐसा हो जो हस्तक्षेप और गलत रिपोर्ट, बढ़ती परंपरा या दूसरे कारणों में फर्क करने में मदद करे।
दूसरी ओर कोई असाधारण घटना मिल भी जाए, तो उसे बताने वाली किताब की हर शिक्षा सही नहीं हो जाती। कारण और उसकी पहचान का तर्क चाहिए। पक्का आश्चर्य भी अपने आसपास के हर दावे पर खाली चेक नहीं लिखता।
मेरा जवाब है: पहले घटना स्थापित करें, फिर कारण और उसकी पहचान का बचाव करें। सकारात्मक प्रमाण जाँचूँगा। धार्मिक होने से छूट नहीं दूँगा। मेरे विश्वास न करने को तार्किक असंभवता का प्रमाण भी नहीं कहूँगा।
28एक स्रोत साथ खोलिए।
सवाल इतना साफ रखिए कि जवाब सच में उस तक पहुँचे।
एक बात से शुरू करें: क्या सामान्य प्रक्रियाओं वाली हाल की वैश्विक बाढ़ का दावा है या धार्मिक अर्थ वाली क्षेत्रीय कथा का? जवाब लिख लें। फिर उत्पत्ति 7-8 साथ पढ़ें। जिस पक्ष को सामने वाला छोड़ चुका है, उसी पर बहस न चलाएँ। [6] [7]
भौतिक दावे के लिए शोध का तरीका खोलिए। क्या मापा, क्या अनुमान लगा, अनिश्चितता क्या बताती है और किस नतीजे पर विचार बदलना होगा? बर्फ और झील वाले लेख ये विवरण सामने रखते हैं। कोई नारा उनका विकल्प नहीं। [8] [9] [10]
शिलालेख में पहले अक्षर, फिर ऐतिहासिक पुनर्निर्माण, फिर अलौकिक निष्कर्ष समझिए। विनाश में नमूने की तारीख और हमलावर की पहचान अलग हैं। हर जोड़ा गया कदम अपना आधार माँगता है। एक सही बात बाकी सभी कदम नहीं उठाती।
जवाब बदलकर ईश्वर ने हर प्रतिकूल निशान मिटा दिया हो, तो साफ पहचानें कि दावा बदल गया है। पूछें कि अब उसके सच होने का सकारात्मक प्रमाण क्या है। हर मापने योग्य असर हटा देने के बाद उसी के मापों पर अंतहीन बहस न करें।
मेरा सबसे छोटा जवाब है: धार्मिक लेखन का वास्तविक इतिहास स्वीकार है। एक सही विवरण से पूरी संग्रहित किताब को सही मानने की माँग स्वीकार नहीं। एक-दूसरे की इज्जत करते हुए भी प्रमाण की गायब कड़ी को मौजूद मानने से इनकार कर सकते हैं।
लेखकपवित्र दावे को छूट नहीं दूँगा।
सीधी आलोचना इतनी सटीक भी हो कि जाँच सह सके।
मुझे विरासत में मिली कथा मानने वाले व्यक्ति को नीचा दिखाने में दिलचस्पी नहीं। सवाल है कि उस कथा को दुनिया के बारे में हमारे विश्वास तय करने का अधिकार मिलना चाहिए या नहीं। भावनात्मक महत्त्व ऐतिहासिक प्रमाण का काम नहीं कर सकता।
शिलालेख, प्राचीन व्यक्ति या असली जगह का प्रमाण होगा तो स्वीकार करूँगा। भौतिक समय-रेखा शाब्दिक कथा से टकराती होगी तो वह भी कहूँगा। कथा पवित्र कह देने से टकराव गायब नहीं हो जाता।
मैं कुछ हजार साल की धरती वाला अर्थ गलत होने से हर संभव रचयिता गलत नहीं कहूँगा। अप्रमाणित पुनरुत्थान को गणित से असंभव भी नहीं बताऊँगा। दावा बदलकर बनाई गई जीत मेरे काम की नहीं।
क्या मेरा आकलन बदल सकता है? सही संदर्भ वाली नई खोज, बेहतर तारीखें, पहले के स्वतंत्र रिकॉर्ड या मौजूद प्रमाण की बेहतर व्याख्या। क्या नहीं बदलेगा? यह माँग कि शुरुआत में ही मान लूँ कि किताब गलत हो ही नहीं सकती।
मेरी बात सीधी है: असली भूगोल चमत्कार की मुहर नहीं, सच्चा विश्वास उसके कारण का प्रमाण नहीं और कल्पना में बनाया बचाव मिली हुई खोज नहीं। जिस दावे को मेरा विश्वास चाहिए, उसे उसका आधार कमाना होगा।
स्रोतस्रोत और जाँच
मूल पदों के लिए NABRE अंग्रेजी संस्करण पहचाना गया है। हिंदी में तर्क अपने शब्दों में समझाया है, किसी अधिकृत हिंदी बाइबल का शब्दशः उद्धरण नहीं। धार्मिक टिप्पणियाँ भी व्याख्याएँ हैं। बर्फ, तलछट और रेडियोकार्बन में माप, मान्यताएँ और अनिश्चितता आती है। संग्रहालय वस्तु की पहचान देते हैं। फार्बर, फ्रीडमन, वुड और क्रेग के अलग मूल तर्क हैं, एक साझा सर्वसम्मति नहीं। जोसीफस और टैसिटस ऐतिहासिक लेखक हैं, हर लिखी घटना के प्रत्यक्षदर्शी नहीं। प्रमाण वाली तुलना समझाने की मौलिक सूची है, नया खुदाई-डेटासेट नहीं। संबंधित अंश और तरीके जाँचे गए हैं। पूरे पाठ की उपलब्धता और पहुँच की सीमाएँ अलग दर्ज हैं। प्रयोगशाला के माप खुद दोहराने का दावा नहीं है।
[1] The Book of Genesis: introduction
USCCB, New American Bible, Revised Edition (NABRE).
कैथोलिक परिचय उत्पत्ति की विद्वत व्याख्या देता है। हर यहूदी या ईसाई परंपरा इसे समान रूप से नहीं मानती। साहित्यिक संदर्भ से दैवी प्रेरणा अपने आप स्थापित नहीं होती।
[2] Genesis 1
NABRE, Genesis 1:1-31 and explanatory notes.
1:11-19 से वनस्पति और ज्योतियों का क्रम लिया है। टिप्पणियाँ पहले और बाद के तीन दिनों की बनावट समझाती हैं। आलोचना लगातार भौतिक निर्माण वाले अर्थ की है। लंबे शब्दशः उद्धरण नहीं दिए गए।
[3] Genesis 2
NABRE, Genesis 2:4-25 and explanatory notes.
2:4-25 और टिप्पणियाँ पढ़ें। 2:5 की खास वनस्पति को सभी पौधों के बराबर नहीं किया गया। बनाया या पहले बना चुका था, यह मेल बैठाने वाली व्याख्या का सवाल है। अंग्रेजी काल से हिब्रू व्याकरण का अंतिम फैसला नहीं किया गया।
पहले बना चुका था वाला NIV पाठ और टिप्पणी देखें
[4] Genesis 5
NABRE, Genesis 5 and explanatory notes.
वंशावली में उम्र और वंश हैं, आधुनिक सृष्टि-तारीख नहीं। छोटी समय-रेखा में और पाठ तथा व्याख्यात्मक मान्यताएँ जुड़ती हैं। एक गणना सभी आस्थावानों पर नहीं थोपी गई।
[5] Sun: Facts
NASA Science, Formation section.
नासा का निर्माण वाला हिस्सा युवा सूरज और आसपास की सामग्री से ग्रह बनने का विवरण देता है। यह वैज्ञानिक पुनर्निर्माण का संस्थागत परिचय है। सूरज के जन्म का सीधा अवलोकन या हर रचयिता का खंडन नहीं।
[6] Genesis 7
NABRE, Genesis 7:1-24 and explanatory notes.
7:2-3 और 19-24 देखें। शुद्ध पशुओं की गिनती अलग है। विनाश का दायरा जमीन पर साँस लेने वाले जीवों से जुड़ा है। जाँची गई व्याख्या हाल की वैश्विक बाढ़ है, हर क्षेत्रीय अर्थ नहीं।
[7] Genesis 8
NABRE, Genesis 8:1-22 and explanatory notes.
पानी उतरने का पूरा क्रम और गिलगमेश के पक्षियों से तुलना वाली टिप्पणी पढ़ें। बारिश के चालीस दिन पूरी अवधि नहीं माने गए। पहाड़ों के क्षेत्र वाले उल्लेख से किसी आधुनिक जहाज-खोज की पुष्टि नहीं की गई।
[8] A 60 000 year Greenland stratigraphic ice core chronology
Svensson et al. (2008), Climate of the Past 4, 47-57. DOI: 10.5194/cp-4-47-2008.
मूल खुला शोध पढ़ा गया, खासकर तरीके, संदिग्ध परतें और तुलना। क्रम 60 हजार साल तक जाता है। मौसम की घटनाएँ मिलाने में शर्तें हैं। शून्य गलती वाली साठ हजार साफ धारियों का दावा नहीं।
[9] A complete terrestrial radiocarbon record for 11.2 to 52.8 kyr B.P.
Bronk Ramsey et al. (2012), Science 338, 370-374. DOI: 10.1126/science.1226660.
हार्वर्ड पर उपलब्ध मूल लेख के संबंधित तरीके और समय-रेखा देखे गए। जमीन के पौधों के अवशेष रेडियोकार्बन सुधार में उपयोगी हैं। BP का आधार 1950 है। इन्हीं आँकड़ों वाली सारणियाँ पूरी स्वतंत्र दूसरी जाँच नहीं हैं।
[10] An extended and revised Lake Suigetsu varve chronology from ~50 to ~10 ka BP based on detailed sediment micro-facies analyses
Schlolaut et al. (2018), Quaternary Science Reviews 200, 351-366. DOI: 10.1016/j.quascirev.2018.09.021.
संशोधित अध्ययन में खराब बची परतों के बीच गायब चक्रों का अनुमान आता है। जाँचे अंतराल में लगभग आधे साल की मौसमी परतें पहचान में थीं। यह सीमा साफ रखी है। बिना मान्यता पचास हजार धारियाँ गिनने का दावा नहीं।
लेखक की स्वीकृत पांडुलिपि खोलें
[11] The Himalayas
US Geological Survey, This Dynamic Earth.
USGS टक्कर, मुड़ी चट्टान, ऊपर उठने और पुराने जमाव का संदर्भ समझाता है। ऊँचाई पर समुद्री अवशेष अकेले हाल की वैश्विक बाढ़ की तारीख नहीं बताते।
[12] Gilgamesh Tablet XI: flood-story fragment
British Museum, Neo-Assyrian tablet fragment, museum number SM.1881.
संग्रहालय की सूची में नियो-असीरियाई तख्ती का टुकड़ा SM.1881 गिलगमेश की ग्यारहवीं तख्ती की बाढ़-कथा के रूप में पहचाना गया है। सूची का खोज में उपलब्ध पाठ पढ़ा गया; सीधा पन्ना 403 लौटा। इससे परंपरा का अस्तित्व समर्थित है, वैश्विक घटना या उधार की दिशा नहीं।
[13] Genesis 10
NABRE, Genesis 10, especially verses 5, 20 and 31.
पद 5, 20 और 31 में भाषाओं के समूह हैं। अध्याय 11 को पीछे लौटती व्याख्या मानने का गंभीर पक्ष रखा गया है। केवल अध्यायों के क्रम को पूरी समय-रेखा नहीं मान लिया गया।
[14] Genesis 11
NABRE, Genesis 11:1-9 and explanatory notes.
11:1-9 और टिप्पणियों में बाबेल, मंदिरों की मीनार और शब्द-खेल का संदर्भ है। सांस्कृतिक संदर्भ दैवी भाषा-परिवर्तन की पुष्टि नहीं है। पहली भाषा या किसी सटीक वैश्विक परिवर्तन-घड़ी का दावा नहीं।
[15] Exodus 12
NABRE, Exodus 12:37-42 and explanatory notes.
12:37-42 में संख्या और निकलने का विवरण है। पुरुषों की संख्या को कुल जनसंख्या से अलग रखा है। परिवारों की अनकही मान्यताओं से सटीक कुल संख्या नहीं बनाई गई।
उसी NABRE संस्करण का उपलब्ध पाठ खोलें
[16] Exodus 14
NABRE, Exodus 14:1-31 and explanatory notes.
समुद्र पार करने की मूल कथा। पाठ, ऐतिहासिक छोटे आधार और अलौकिक दावे अलग हैं। मिस्र की वास्तविक जगह या साधारण बाढ़ अकेले इस हस्तक्षेप की पुष्टि नहीं करती।
उसी NABRE संस्करण का उपलब्ध पाठ खोलें
[17] The Torah's Exodus
Zev Farber (2015), TheTorah.com, original scholarly argument.
फार्बर आकार और संख्यात्मक शब्द के कुल वाले अर्थ की आलोचना करते हैं। यह उनका विद्वत तर्क है। मूल खुदाई-रिपोर्ट या हर छोटे पलायन के न होने का सर्वसम्मत माप नहीं।
[18] The Historical Exodus
Richard Elliott Friedman (2015), TheTorah.com, original scholarly argument.
फ्रीडमन पाठ, नाम और धार्मिक संकेतों से छोटे लेवी पलायन का पक्ष रखते हैं। इसे विवादित कदम वाला पुनर्निर्माण कहा है। इससे विशाल संख्या और सभी चमत्कार स्थापित नहीं होते।
[19] Israel in the Merneptah Stela
Michael G. Hasel (1994), BASOR 296, 45-61. DOI: 10.2307/1357179.
हेज़ल लगभग 1207 ईसा पूर्व के शिलालेख और कनान में इस्राएल की व्याख्या करते हैं। उपलब्ध प्रकाशक-सार से इतना सीमित उपयोग है। पूरा लेख पढ़ने का दावा नहीं। शिलालेख खुद मूसा या समुद्र पार करना नहीं बताता।
[20] Tell es-Sultan (Jericho): Radiocarbon Results of Short-Lived Cereal and Multiyear Charcoal Samples from the End of the Middle Bronze Age
Hendrik J. Bruins and Johannes van der Plicht (1995), Radiocarbon 37(2), 213-220.
1995 का मूल लेख, संबंधित नमूने, तरीका और निष्कर्ष जाँचे गए। अनाज और कई वर्ष पुरानी लकड़ी अलग हैं। अंतिम सत्रहवीं या सोलहवीं सदी का संशोधित अनुमान सटीक सार्वभौम तारीख या बाद में बसावट न होने का प्रमाण नहीं बताया गया।
[21] Carbon 14 Dating at Jericho
Bryant G. Wood (7 August 2008), Associates for Biblical Research; original reply.
वुड का अपना जवाब लगभग 1400 ईसा पूर्व को बर्तनों और मिस्र के कालक्रम से जोड़ता है। वह पहले के गलत कार्बन नतीजे के सुधार और बाद के अनाज-माप भी स्वीकार करता है। पूरा खोज में उपलब्ध उत्तर पढ़ा गया। कालक्रम पर उसके सामान्य दावे स्वतंत्र रूप से सिद्ध सहमति नहीं माने गए।
[22] Tel Dan Stele
The Jewish Museum, exhibition with original object on loan from the Israel Museum.
प्रदर्शनी नौवीं सदी ईसा पूर्व के राजवंशीय शिलालेख और मूल संग्रहालय को पहचानती है। दाऊद के राजवंश का उल्लेख उपयोगी आधार है। पूरी जीवनी और राज्य का आकार अलग प्रश्न हैं।
[23] In the Path of Christianity
The Israel Museum, Jerusalem; exhibition including the Pontius Pilate inscription.
इस्राएल संग्रहालय प्रदर्शनी में पीलातुस का शिलालेख पहचानता है। यहाँ वस्तु का होना और ऐतिहासिक संबंध ही इस्तेमाल हुआ है। अधूरे अक्षरों का खास पुनर्निर्माण या चमत्कार नहीं निकाला गया। सूची का उपलब्ध खोज-पाठ पढ़ा गया; सीधे अनुरोध में TLS प्रमाणपत्र की समस्या रही। सुरक्षा जाँच बंद नहीं की गई।
[24] Matthew 2
NABRE, Matthew 2:1-23 and explanatory notes.
मत्ती 2:1 जन्म को हेरोद के समय रखता है। टिप्पणी सामान्य 4 ईसा पूर्व मृत्यु-समय बताती है। यह मूल कथा है, आधुनिक स्वतंत्र जन्म प्रमाणपत्र मानकर नहीं पढ़ी गई।
उसी NABRE संस्करण का उपलब्ध पाठ खोलें
[25] Luke 2
NABRE, Luke 2:1-7 and historical note on 2:1-2.
2:1-7 और 1-2 की ऐतिहासिक टिप्पणी देखें। उसमें 6-7 ईस्वी, पहले शासन की कठिनाई और अलग पंजीकरण का फर्क है। समाधान को दस्तावेज और भाषा का मेल चाहिए। सटीक जन्मदिन नहीं निकाला गया।
उसी NABRE संस्करण का उपलब्ध पाठ खोलें
[26] Antiquities of the Jews, Book XVIII
Flavius Josephus, Antiquities 18.1.1; William Whiston translation, University of Chicago host.
Antiquities 18.1.1 में सीधे रोमन प्रशासन के बाद क्विरिनियुस और संपत्ति-आकलन है। विश्वविद्यालय पर व्हिस्टन का पुराना अंग्रेजी अनुवाद है। जोसीफस को हर घटना का प्रत्यक्षदर्शी या अचूक लेखक नहीं माना।
[27] 1 Corinthians 15
NABRE, 1 Corinthians 15:1-19, especially 3-8.
15:3-8 में पौलुस मिली परंपरा और अपना दावा देता है। पाँच सौ से अधिक लोगों वाली रिपोर्ट को पाँच सौ बचे स्वतंत्र गवाह-बयानों से अलग रखा है। उसी NABRE संस्करण की उपलब्ध प्रति में पाठ और टिप्पणियाँ पढ़ी गईं।
उसी NABRE संस्करण का उपलब्ध पाठ खोलें
[28] Mark 16
NABRE, Mark 16 and textual notes on 9-20.
अध्याय और पाठ-टिप्पणियाँ खाली कब्र तथा लंबे अंत का फर्क बताती हैं। बाद का पाठ पौलुस के पहले वाले पुनरुत्थान-विश्वास को मिटाता नहीं। धर्मग्रंथ में स्वीकृति और मूल लेखक का होना अलग बातें हैं।
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[29] Jesus' Resurrection
William Lane Craig, Reasonable Faith, original argument.
क्रेग का अपना सम्मिलित तर्क पहले रखा, फिर उसकी कड़ियाँ जाँचीं। विद्वानों की सहमति पर उनके कथन को स्वतंत्र जाँचा सर्वसम्मत निष्कर्ष नहीं माना। किसी वैकल्पिक मानसिक निदान को प्रमाणित इतिहास नहीं कहा।
[30] Annals 15.44
Tacitus, Annals 15.44; J. Jackson Loeb translation, University of Chicago host.
Annals 15.44 का जैक्सन अनुवाद। टैसिटस पीलातुस और तिबेरियुस के समय ख्रिस्तुस की हत्या लिखता है। वह बाद का रोमन लेखक है। उसकी जानकारी का स्रोत यहाँ स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं, न यह पुनरुत्थान की प्रत्यक्ष गवाही है।